मार्केट में हाल के बदलाव से एक बड़ा प्रश्न उभर रहा है कि बैटरीजनों के लिए अपने बिज़नेस में BESS और EV सेक्टर को जोड़ना क्यों ज़रूरी है?
मार्केट में तेज़ी से हो रहे बदलावों के कारण बैटरी व्यवसायियों के लिए BESS (बैटरी एनर्जी स्टोरेज़ सिस्टम) और EV (इलेक्ट्रिक व्हीकल) सेक्टर को अपनाना अब अस्तित्व और विकास की सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है।
पारंपरिक बैटरियों के उपयोग में अब लिथियम का उपयोग लगातार बढ़ता जा रहा है। पूरी दुनिया रिन्यूएबल एनर्जी (सोलर/विंड) और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर तेज़ी से शिफ्ट हो रही है। चौबीसों घंटे सोलर पावर सप्लाई और ग्रिड को स्थिर रखने के लिए बड़े क्षमता वाले BESS की भारी मांग पैदा हो गई है। वहीं, तेज़ी से बिक रही इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) ने एडवांस लिथियम-आयन बैटरियों का एक विशाल नया मार्केट खोल दिया है।
यदि कारोबारी इस आधुनिक तकनीक के साथ ख़ुद को अपग्रेड नहीं करते हैं, तो वे प्रतिस्पर्धी बाज़ार में पिछड़ जाएंगे। भविष्य में प्रासंगिक बने रहने, तेज़ ग्रोथ हासिल करने और नए ग्राहकों के एक बड़े वर्ग तक पहुँचने के लिए अपने बिज़नेस को BESS और EV सेक्टर से जोड़ना अब अनिवार्य कदम है।
इस बड़े बदलाव के लिए इंडस्ट्री को मज़बूत बनाने के इरादे से, 21वां पावर ऑन, गोवा में बैटरी इंडस्ट्री के लिए बिज़नेस के बहुत बड़े अवसर बनाने जा रहा है। यह कार्यक्रम 5 से 7 फरवरी 2027 तक गोवा के पणजी में स्थित ख़ूबसूरत Campal Multipurpose Ground में होगा।
शुरुआत की चिंगारी और नाम
21 वें वर्ष में प्रवेश करते हुए पावर ऑन के इतिहास और आधार को जानना भी बेहद जरूरी है। पावर ऑन के पीछे का मुख्य विचार बेहद महत्वपूर्ण था: SME बैटरी इंडस्ट्री के लिए एक राष्ट्रीय संगठन बनाना, जहाँ राष्ट्रीय स्तर की समस्याओं पर चर्चा हो सके और उन्हें सीधे केंद्र सरकार तक पहुँचाया जा सके। इस विचार को धरातल पर उतारने के लिए पावर ऑन की शुरुआत हुई। ‘पावर ऑन’ को इसका मशहूर नाम श्री विजयराजन जी ने दिया। इस आयोजन की आधिकारिक शुरुआत 2 जनवरी 2004 को हैदराबाद में हुई थी।
फैडरेशन बनाने का विचार पश्चिम बंगाल बैटरी एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष, श्री यशपाल कनोत्रा जी का था, जिसे मुंबई और हैदराबाद बैटरी एसोसिएशन का पूरा समर्थन मिला। इस संगठन को बनाने वाले दूरदर्शी लोगों का विशेष धन्यवाद, जिनमें हैदराबाद बैटरी एसोसिएशन के उस समय के अध्यक्ष स्वर्गीय डॉ. वी. के. अग्रवाल, श्री मदन जी, राजेश बंसल, संजय और मुंबई बैटरी एसोसिएशन से श्री शरद संघवी शामिल थे ।
पावर ऑन का विज़न
पावर ऑन का लक्ष्य छोटे और मध्यम दर्जें के बैटरी व्यवसायों को सबल बनाना था। उन्हें मार्केटिंग का प्लेटफॉर्म देना जहां वे सीधे अन्य बैटरीजनों से जुड़ कर अपने मार्केट का विस्तार कर सकें और प्रोडक्ट को बेहतर बनाने के लिए मशीनों और तकनीकी सहायता को पा सके। इसको अलग-अलग शहरों में करने का कारण भी यही था कि अधिक से अधिक लघु बैटरी उद्यमी इससे जुड़कर लाभांवित हो सकें। 2004 से हैदराबाद से शुरू हो कर, कानपुर, जयपुर, चंडीगढ़, नोएडा, आगरा, कोलकाता, पुणे, गांधीनगर, बेंगलुरु, इंदौर और अहमदाबाद जैसे शहरों में इसका आयोजन हुआ, जिसका लाभ बैटरी उद्योग को हुआ।
BESS और Hybrid Inverter की बढ़ती डिमांड
आज के समय में सिर्फ़ पारंपरिक बैटरी ही काफ़ी नहीं है। रिन्यूएबल एनर्जी - जैसे सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा के जुड़ने से BESS (Battery Energy Storage Systems, जिसे बड़े स्तर का ऊर्जा संग्रह करने वाला सिस्टम या पावर बैंक कहा जा सकता है) और हाइब्रिड सोलर सोल्यूशन्स का बाज़ार बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है। ये आंकड़े उन SMEs के लिए एक बहुत बड़ा और नया अवसर प्रस्तुत कर रहे हैं, जो बदलाव के लिए तैयार हैं।
सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के अनुमान के मुताबिक़, भारत की BESS की ज़रूरत सिर्फ़ आने वाले पाँच सालों में, 2026-27 के मौजूदा स्तर से लगभग 7 गुना तक बढ़ जाएगी।
BESS के साथ-साथ, सपोर्ट करने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी ज़बरदस्त ग्रोथ (विकास) हो रही है, जिससे बैटरी बनाने वालों के लिए कमाई के कई नए रास्ते खुल रहे हैं।
बिज़नेस के नए अवसर
बिजली की बढ़ती डिमांड और सप्लाई के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए, 21 वें पावर ऑन में BESS, लिथियम बैटरी और EV सेगमेंट को आधिकारिक रूप से जोड़ दिया है। यह रणनीतिक बदलाव पावर ऑन के भागीदारों के लिए बिज़नेस के बहुत बड़े अवसर लेकर आया है:
1. सोलर बूम तक सीधी पहुँच : पावर ऑन के साथ महा एक्सपो द्वारा सोलर प्रदर्शनी का भी आयोजन साथ ही होगा। चूँकि सोलर पावर और हाइब्रिड इनवर्टर पूरी तरह से बैटरी पर निर्भर हैं, इसलिए SME बैटरीजनों को ऐसे हज़ारों तैयार ग्राहकों तक सीधी पहुँच मिलेगी, जिन्हें BESS और सोलर के साथ बैटरी की तलाश है।
2. अंतर्राष्ट्रीय अनुभव और ऑटोमेशन: पावर ऑन-2027 अब एक ग्लोबल प्लैटफॉर्म बन चुका है। यह विदेशी बैटरी वालों को अपनी एडवांस्ड व नई टेक्नोलॉजी दिखाने का अवसर देता है। इससे लोकल SMEs को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मानक अपनाने, अपनी मैन्युफैक्चरिंग सुधारने और 236 GWh की विशाल राष्ट्रीय डिमांड को पूरा करने के लिए अपनी यूनिट्स में ऑटोमेशन लाने में मदद मिलेगी।
3. सप्लाई की कमी : चूँकि मार्केट का झुकाव अब बड़ी कैपेसिटी वाले स्टोरेज़ और EVs की ओर है, इसलिए पावर ऑन-2027 एक बेहतरीन ब्रिज का काम करेगा। यह इंडस्ट्री को सटीक सोल्यूशन्स देगा, जिससे लघु बैटरी निर्माता अपनी पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग से निकलकर, तेज़ी से बढ़ रहे लिथियम-आयन और BESS जैसे सेक्टर्स में क़दम रख सकेंगे।
पावर ऑन-2027 सिर्फ़ एक एग्जीबिशन नहीं होगी। लघु बैटरी निर्माताओं को मज़बूत बनाने और भारत के एनर्जी स्टोरेज बूम में वह जगह होगी जहाँ एनर्जी मार्केट में अवसर का भविष्य एक नया आकार लेगा।